गीतिका (आधार छंद 'गीतिका' )
2122 2122 2122 212 अथवा
गालगागा गालगागा गालगागा गालगा
समान्त- आनी, पदान्त - हो गयी
बह रहीं कैसी हवाएँ बागवानी हो गयी !
प्रश्न उठते अब नयन बेटी सयानी हो गयी ! 1
---------------------
खिल सका उपवन हमारा,बेटियों के मान से,
हाँ बचाया कोख हमने पर अमानी हो गयी ।
आँधियों को दोष क्या दें घर हमारे ढह गये,
ढह गया आदर्श जब बेटी बचानी हो गयी ! 2
धर्म के आलय जहाँ उठतीं हया की बोलियाँ
रो रही क्यों अस्मिता खो आज पानी हो गयी ! 3
दिन उजाले को बनाते हैं अमावस क्यों घना,
रात की छाया डराती सी जवानी हो गयी ! 4
खोल दी हमने किताबें आज करुणा प्रेम की,
छल प्रपंचों की कथा सुननी सुनानी हो गयी ! 5
डॉ. प्रेमलता त्रिपाठी
2122 2122 2122 212 अथवा
गालगागा गालगागा गालगागा गालगा
समान्त- आनी, पदान्त - हो गयी
बह रहीं कैसी हवाएँ बागवानी हो गयी !
प्रश्न उठते अब नयन बेटी सयानी हो गयी ! 1
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खिल सका उपवन हमारा,बेटियों के मान से,
हाँ बचाया कोख हमने पर अमानी हो गयी ।
आँधियों को दोष क्या दें घर हमारे ढह गये,
ढह गया आदर्श जब बेटी बचानी हो गयी ! 2
धर्म के आलय जहाँ उठतीं हया की बोलियाँ
रो रही क्यों अस्मिता खो आज पानी हो गयी ! 3
दिन उजाले को बनाते हैं अमावस क्यों घना,
रात की छाया डराती सी जवानी हो गयी ! 4
खोल दी हमने किताबें आज करुणा प्रेम की,
छल प्रपंचों की कथा सुननी सुनानी हो गयी ! 5
डॉ. प्रेमलता त्रिपाठी
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